Gulmohar ka Dard | गुल्मोहर का दर्द

कहने को तो दोनो के घर आमने -सामने थे, मगर वो चंद कदम का फासला किसी सागर से कम नहीं था।एक अदद कशिश थी उसकी आवाज़ में, जो हर किसी को जो हर किसी को अपना दीवाना बना देती थी।उसका हर एक लफ्ज़ जैसे कानो में मिश्री गोल देता था…..

वो जब भी अपनी सखियों संग चाँद की रौशनी में टहलने निकलती थी, वो लड़का अक्सर चाँद हो जाया करताथा।बीहड़ो का वो अल्हड लड़का, जब भी घर से निकलता ,आँखे हमेशा उसे ही तलाश रही होती थी।चाहे CKD हो या BBC उसे तो बस एक बहाना चाहिए होता था उसको एक नज़र निहार ने का, जैसवो उसकी धड़कने बन चुकी थी…..

वो अक्सर उससे बात करने की कई नाकाम कोशिश करता, उसको देखने के लिए labs और classes बंक करा करता था…

माल रोड की की उन हसीं सड़को पर जहां लड़को की नज़रे कुछ बर्फ सी हो जातीथी,वहा वो गुलमोहर के पेड़ के पीछे से उसे ताका करता था,उसे निहारा करता था….

कुछ दिनों से वो कुछ व्यस्त सी दिखाई पड़ती थी,
नयी उम्र भरपूर अंगड़ाई ले रही थी, और उस गाफलत मे ये भी कहा बचने वाली थी,छुट्टी का समय था,वो अपने एक दोस्त के साथ उसकी तलाश में था….

वो किसी और का हाथ थामे पार्क में घूम रही थी..बेचारे का दिल धक्क् रह गया,आज पहली बार उसे campus की फ़िज़ा में ऑक्सीजन की कमी महसूस हो रही थी…..वो पार्क में घूम रही थी…जाती हुई बस में गाना बज रहा था…

“इश्क़ अगर एक तरफ हो तो सजा देता है,
और अगर दोनों तरफ हो तो मज़ा देता है”..

..वो अभी भी वहीं खड़ा था अपने दोस्त के साथ….

गुलमोहर के पेड़ के पीछे…

Cherry wale lips |चेरी वाली लिप्स

 
 
पता नही यार ये मिड sem  की प्रकिया होती ही क्यू है | इसका मूल उद्देश्य बेचारे सो कॉल्ड इंजिनीयर्स को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने से ज़्यादा और कुछ नही होता है |
 
फॉर्मल शूस को ज़मीन पर बजाने का कोई लॉजिकल अर्थ नहीं था | लेकिन, ऐसा नही करना भी मुनासिब नही था |क्या करे, आता तो कुछ था नही, और इस बार तो साला कॉलेज वाले भी हमको एलिजिबल कर दिए, जाओ बेटा, कर लो अपनी इच्छा पूर्ति ,दे दो मिड सेम | इनविजिलेटर मेडम को दस सेकेंड मे दस डिफरेंट एंग्ल से ताड़ चुके थे, इनमे वो वाली बात नही है,जो खिड़की के पास बैठी लड़की पर थी | पिंक कलर की फ्रेम पर छोटे छोटे डॉगी बने हुए थे, और एक बाल की सुनहरी लट थी, जो की धूप मे सोनी सी दिख रही थी | चेरी कलर की गाढ़ी सी लिपस्टिक, जो की लगभग पेन के कोने को लाल कर चुकी थी |उसको देखने के बाद अगर पेपर को देखता, तो क्यूपिड की धारा 143 के तहत आजीवन सिंगल रहने की सज़ा हो जाती |
 
३ बार धमकी मिल चुकी थी , पर हम भी पक्के कोर वाले , इतने जल्दी समझ जाते तो ब्रांच बुरा मान जाती | और फिर ५ महीने बाद पास आउट होकर इंजिनियरिंग की डिग्री को क्या मुँह दिखाते |सो अब पूरी शिद्दत के साथ , उस मखमली सपने को देख रहे थे |हम कब झरने मे बहते चले गये, नही पता| पर टेबल पर से कॉपी गायब हो चुकी थी|सामने वही मेडम खड़ी थी , जिनको ताड़ना हम भूल चुके थे, शायद बुरा मान गयी|
 
“चलो, बहुत लिखना हो गया, जाओ”
हम अभी तक चेरी वाली लिप्स को ही देख रहे थे|
 
बस जाते जाते समय से एक ग़लती हो गयी|
 
टॉप तो हमने ही किया है …….
 
वो हमको देख कर मुस्कुरा दी………