Cherry wale lips |चेरी वाली लिप्स

 
 
पता नही यार ये मिड sem  की प्रकिया होती ही क्यू है | इसका मूल उद्देश्य बेचारे सो कॉल्ड इंजिनीयर्स को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने से ज़्यादा और कुछ नही होता है |
 
फॉर्मल शूस को ज़मीन पर बजाने का कोई लॉजिकल अर्थ नहीं था | लेकिन, ऐसा नही करना भी मुनासिब नही था |क्या करे, आता तो कुछ था नही, और इस बार तो साला कॉलेज वाले भी हमको एलिजिबल कर दिए, जाओ बेटा, कर लो अपनी इच्छा पूर्ति ,दे दो मिड सेम | इनविजिलेटर मेडम को दस सेकेंड मे दस डिफरेंट एंग्ल से ताड़ चुके थे, इनमे वो वाली बात नही है,जो खिड़की के पास बैठी लड़की पर थी | पिंक कलर की फ्रेम पर छोटे छोटे डॉगी बने हुए थे, और एक बाल की सुनहरी लट थी, जो की धूप मे सोनी सी दिख रही थी | चेरी कलर की गाढ़ी सी लिपस्टिक, जो की लगभग पेन के कोने को लाल कर चुकी थी |उसको देखने के बाद अगर पेपर को देखता, तो क्यूपिड की धारा 143 के तहत आजीवन सिंगल रहने की सज़ा हो जाती |
 
३ बार धमकी मिल चुकी थी , पर हम भी पक्के कोर वाले , इतने जल्दी समझ जाते तो ब्रांच बुरा मान जाती | और फिर ५ महीने बाद पास आउट होकर इंजिनियरिंग की डिग्री को क्या मुँह दिखाते |सो अब पूरी शिद्दत के साथ , उस मखमली सपने को देख रहे थे |हम कब झरने मे बहते चले गये, नही पता| पर टेबल पर से कॉपी गायब हो चुकी थी|सामने वही मेडम खड़ी थी , जिनको ताड़ना हम भूल चुके थे, शायद बुरा मान गयी|
 
“चलो, बहुत लिखना हो गया, जाओ”
हम अभी तक चेरी वाली लिप्स को ही देख रहे थे|
 
बस जाते जाते समय से एक ग़लती हो गयी|
 
टॉप तो हमने ही किया है …….
 
वो हमको देख कर मुस्कुरा दी………
 
 
 
 
 
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Where are you | तुम कहाँ हो

कभी कभी ट्रेन मे सिंगल विंडो सीट पर
आँखें  तुम्हे ढूँढती है, तुम कहाँ हो,
कभी कही चलती हवाओं मे ढूँढने लगती है
तुम्हारी खुश्बुदार ज़ूलफें, तुम कहाँ हो
या यूँ कह लो, के पोहे की प्लेट मे , एक चम्मच
किसी का करता है इंतेज़ार की तुम कहाँ हो,
यही हर चहेरे मे ढूँढ ती है नज़रे
तुम्हारा अक्स ना जाने  तुम कहाँ हो…………..
मैं अकसर गम ज़द हो जाता हूँ, देख कर
उड़ते हुए परिंदो का जोड़ा, तुम कहाँ हो
आँखें थक गयी है दीदार को तेरे,क्यू जाने
फूल खुश्बू को पूछते है, तुम कहाँ हो
नींद आँखो मे बर्फ सी रहती है,
आँसुओं से झगड़ती है तुम कहाँ हो
साँसे जिस्म मे होती है फिर भी दिल से पूछती है
ज़िंदा हो तो ये बताओ आए धड़कनो तुम कहाँ हो…..

Reality|असलियत

तपती दो पहर मे वो सर पार असर आता है,
डूबता है इंसान तो बस मसान नज़र आता है
ख्वाहिशे सरगोशियाँ करती है नन्हे ठिकानो पर
फूटी गुल्लाकों मे जब कलदार नज़र आता है,
रिश्तो की नौटंकी मे आपका ईस्तकबाल करता हूँ
हर मुघोटा यहा फनकार नज़र आता है
जवानी बुढ़ापा ये दौलत के किस्से फ़िज़ूल की बातें हैं
वो बचपन का आँगन जब सुनसान नज़र आता है
फट जाते है आँचल, आबरू ज़ामी डोज़ होती हैं
मिट्टी के पुतलो मे कहा इंसान नज़र आता हैं
रफ़ीक़ कई थे , बस कंधे बदल रहे थे
हर रिश्ता दो घड़ी का मेहमान नज़र आता है
दर्द मे डूबिए, इश्क़ है, ज़िंदा  कोई नही  बचा
वस्ल की राह मे जब दिल दार नज़र आता है
कोई चहेरा दिमाग़ की नसे खटखटाता है
पुरानी किताबो मे जब तन्हा  गुलाब नज़र आता है

Tu Jahan se mila

तू जहाँ मे मिला तो जहाँ मिल गया
 गुनाह करता रहा    हूँ खुदा मिल गया
वो मिलता नही है अब ख्वाबो की तरह
नींदे उड़ गयी जब से पता मिल गया
जब आया नही जवाब   पुराने खतों   का
मुझको अश्को से भीगा रूमाल मिल गया
दिल चीज़ क्या उनसे ही पूछ ली जिए
जिन्हे खंजर लगा कर सुकून मिल गया
 किनरो से दाह करने वाले ओ समुंदर
 नदियों के इश्क़ से कों सा  खुदा मिल गया
 मोहोलत मिल गयी उन्हे भी दिल जलाने की
 क्यू सौतन के दिल को  जुनून मिल गया
 ता उमरा महफूज़ रखा आग से, तुझको
 चिंगारी से इश्क़ कर सुकून मिल गया